खासियत

कुछ तो बात है पहाड़ों में

जो हमें खींच लेती है

अक्सर

और हम भी शायद मौके की तलाश में रहते हैं

कुछ तो है

जो एक तरफ गिरनारों से सजी

और दूसरी तरफ गहराइयों

में झांकती हुई सड़कों पर भी

मन उददवेलित हो उठता है

धूप ऐसी की या तो 

गिरनारों की कतारों

के बीच में से

सरकने का नाम ही न ले

जैसे कोई मेहबूब मिल गया हो बीच रास्ते कहीं

पर खैर, या तो उसके दर्शन होंगे नहीं

या फिर पहाड़ों से टकराकर

आंखों पे चमक मारकर

अपने होने का अहसास भी

ये बखूबी कर जाती है

पर मन बच्चा तब बन जाता है

जब चट्टानों के बीच से

कोई झरना यकायक

फूट पड़ता है

और उसमें भीगने पर

बचपन याद आ जाता है

शायद कभी ऐसे ही 

बारिशों में उछला करते थे कभी

जो आज उन झरनों में

कूदने मचलने की

बस आस किया करते हैं

बचपन को दिल के किसी कोने में

कहीं पिंजरे में कैद करके बैठा रखा है शायद

पर जब पहाड़ देखता है

तो वो दौड़ पड़ता है

अविरल हो उठता है

दीवारें लांघ जाता है

समुंदर तैर जाता है

और पिंजरे तो वो

चुटकियों में ही तोड़कर

फुर्र हो जाता है।
जब आसमानों से

रुई को फाहों जैसी

बर्फ टपकती है

तो ये बचपन

मोटी मोटी बर्फ की गेंदों

में तब्दील हो जाता है

और बिखर पड़ता है

किसी के मुखपटल पर

जब पहाड़ों पर

बचपन यौवन चढ़ता है

कुछ तो खास है

इन संकरी गलियों में

जहां घूमना भी

चढ़ाई कहलाता है

और दौड़ना तो जैसे

कसरत हो उठता है

पर फिर भी

बचपन तो बचपन है

पहाड़ों के आगोश में आते ही

खुदबखुद बहल जाता है।

कुछ तो खास है इन पहाड़ों में।।

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हमनवां

रात के दो बजे

उसकी आवाज़ जब कानों में पड़ती है

तो संगीत भी शर्माने लगता है

स्वर खुदबखुद थिरकने लगते हैं

कान भावविभोर होकर गदगद हो चले हैं

और नींद 

नींद का तप पूछिये ही मत

कमबख्त गलत वक़्त पे आ जाती है

कभी इल्म नही होता कि ऐसा भी होगा

की नींद भी आएगी

पर आँख खुली रहेगी

जैसे ड्राइवर की खुली रहती हैं

हरि बत्ती को देखकर

तो हम भी बस पशोपेश में थे

के तभी उन्होंने मधुरता से

आग्रह भर किया

की सुनिए,

“इस रात की भी सुबह होगी”

पहले तप हम हँसे

और फिर

किस्सा खत्म किया

थोड़ा हँसे

और अपने सिर पर थपकी दी

और बस बिस्तर को रात का 

हमनवां बना लिया।।

सुबह

आज आंख खुलीं तो समझ आया

कि सपना था

उनका यूँ पास आना

मुस्कुराना, अठखेलियां करना

फिर किसी बहाने गम हो जाना

और पीछे अपने जिस्म की

वो सोंधी सोंधी सी

मिठास छोड़ जाना

जिसे हम दिल के पिंजरे में

कैद किये रखे हैं

एक नादान पंछी की तरह

कभी कभी पुचकार लेते हैं

तो कभी दाना डाल देते हैं

उससे ही मन बहला रहता है

क्योंकि वो तो कहीं और मशगूल हैं

हमारी पीर वो अभी कहाँ समझेंगे

सोचकर हम झट से उठ बैठते हैं

सपना ही था

पर हम भी कौनसा कम हैं

वास्तविकता बदलने में खुद को

घिसाये पड़े है

ऊन्स ने उनके बहके खड़े हैं।

ऊन्स ने उनके बहके खड़े हैं।।

लोग

यूँ ही राहों में

कभी कभी

अक्सर

कुछ लोग मिल जाते हैं

जो बेहद सर्द रातों की नींद में

अपनी बातों की गर्माहट भर जाते हैं

कुछ खास होते हैं वो लोग

इंद्रधनुष की तरंगों की तरह

विरले ही दिखा करते हैं

और शायद 

क्षण भर के लिए ही सही

पर ज़िन्दगी का एहसास

पल भर ही जैसे करा जाते हैं
वो लोग अलग होते हैं

जो दिल के लिफाफे में जैसे

एक चिट्ठी भर छोड़ जाते हैं

वो जो आप करीने से

ताउम्र सम्हाले रखते हैं

इस उम्मीद में

की न जानें कहीं

कहीं किस रोज़

किस डगर

वो फिरसे मिल जाएं

और अपनी कुछ यादें 

ताज़ा हो जाएं।
कुछ लोग अलग होते हैं

क्योंकि उनका आशियाना

दिलों के घोसलें होते हैं।।

हँसी

तेरे चेहरे पे पड़ने वाली

वो शैतानी हँसी की चमक

जब आती है तो कुछ कह जाती है

हवा की तरह इंसानी दीवारों को चीरती हुई

वो सीधे दिल के दरवाजे तक जा पहुंचती है

और दस्तक देती हुई कहती है

“अब बस भी करो

यूँ मंद मंद मुस्काना

चलो बैठे कहीं

न फिर कहीं 

बस इंतजार में ही

इस शमा की रात हो जाए।।

Broken

And she picked 

those trinkets

of her broken self

And threw them,

And pushed them deep

into her heart

For never to be pushed again

“Too far”,

She said,

And she left,

bits and pieces,

here and there,

And a diminished smile,

Indicative of her inner peace,

For she never felt,

What it was to be broken,

yet again..

Absence

In the morning

When the first light fell

On the mountain next to my window

Eyes lit up

Nature’s magnificence

Came to the fore

As the light went on

Jumping on the wild deodar treetops

As if waking them up

From a slumber

The mist that had gathered

The last night

Melted into the earth

Like a lover

Melts into the other’s arms

And my heart aches

For I miss

The tender touch of her aloe skin

As her hands wandered

And clamped into mine

A bond forms

And ignites

The sinking feeling,

yet again,

If only,

You could have been here

If only,

She were here..